स्कूल के दिन , सुनहरा समय खोते आज के बच्चे।

स्कूल
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स्कूल के दिन

स्कूल

स्कूल एक ऐसा मंदिर जहा से हम लोग अपने जीवन की शुरुवात उस प्रकाश की खोज के लिए करते हैं जोकि यह बताता हैं कि हमारा आने वाले कल में कितना प्रकाश मिल पायेगा, जब हम आपने स्कूल में थे तो हम सब ने बहुत मस्ती की होगी कुछ यादें ऐसे हम सब के पास होती हैं जिनसे हम कभी कभी अकेले में मुस्कुरा उठते हैं और फिर धीरे से चेहरे को एक तरफ मोड़कर सोचते हैं कि काश फिर से वो दिन शुरू हो सकता।
आज हम यहाँ पर ये बात करने आये हैं कि इस corona में उन बच्चो का क्या जो न तो स्कूल जा पा रहा हैं और न ही खुद को परख पा रहे हैं कि वो जिस प्रकाश की तलाश में निकले हैं वो सही दिशा में खोज रहे हैं या फिर वो गलत दिशा की तरफ बढ़ रहे हैं।
सवाल सिर्फ इतना ही नहीं हैं और गहराई में अगर सोच जाए तो क्या जो हमलोग कभी कभी अकेले में मुस्कुरा लेते हैं क्या ये बच्चे भी कर पाएंगे।
ये समझ मे आते आते हम अपने बच्चे का बचपन खो चुके होंगे।

अब अगर हम बात पढ़ाई की करे तो शायद आप समझ सकते हैं कि इन दौरान पढ़ाई में क्या चल रहा हैं , न तो परीक्षा हो रही हैं और न तो ढंग से बच्चों को बाहत ज्यादा पढ़ाई समझ मे आ रही हैं।
बच्चे अपने स्कूल के दोस्तों को मिस कर रहे है तो माता पिता उनके भविष्य को लेके चिंतित हैं क्योंकि ये कोरोना तो आज नही कल खत्म हो ही जायेगा पर जो इसकी वजह से हमारे बच्चों के भविष्य पर संकट आया हैं वो हम कभी सही कर पाएंगे।
इन सब सवाल का जवाब मिलना मुश्किल हैं लेकिन अब माता पिता को बच्चे के भविष्य को बचाने के लिए आगे आना होगा और इस चीज़ को समझते हुए ये फैसला लेना होगा कि अब बच्चो को कहा से अच्छी शिक्षा दिलाई जाए।

बच्चे तो चंचल होते हैं उनको शायद अभी इतना न समझ आये की क्या चल रहा हैं।
पर हमको एक समझदार अभिवावक को तरह अपने बच्चों को सम्हालना होगा।

 

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