साल 2020: गमजदा रहा बॉलीवुड

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साल 2020: गमजदा रहा बॉलीवुड

साल 2020 सच काफी हलचल साथ लेकर आया है।दुनिया कोरोना की तबाही से परेशान है भारत में भी इसका खौफ कम नहीं है।इसी महामारी के बीच बॉलीवुड ने अपने दो सितारों को खो दिया।
शानदार अदाकारी और शांत अंदाज़ से बॉलीवुड में अलग पहचान बनाने वाले इरफान खान के जाने के गम से सेनिमा जगत अभी उभर भी नहीं पाया था कि अगले ही दिन 30 अप्रैल की सुबह बॉलीवुड के चिंटू जी यानि ऋषि कपूर साहब के चले जाने की खबर सुर्खियां बन गई।आज का हमारा यह वीडियो इन्हीं सितारों के बारे में है।जो इस दुनिया में रहे न रहे लेकिन उनकी चमक बॉलीवुड में हमेशा बरकरार रहेगी।
यूं तो कहा ही गया है कि अभिनेता जीता या मरता है लेकिन किरदार हमेशा अमर होता है और वह उसी से जाना जाता है।कुछ ऐसा ही है हमारे मदारी और बॉबी के राजा के साथ।रोचक बात तो यह है कि अंतिम सफर पर भी दोनों साथ हो लिए।
इरफान करीब एक साल से न्यूरोंडेडोकाइं ट्यूमर से जूझ रहे थे।लेकिन पीछले मंगलवार को कोलन इंफेक्शन की शिकायत के बाद मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती करवाया गया,जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।गूगल ने इरफान की मौत पर ऐसे ही नहीं कह दिया कि जादुई प्रदर्शन का एक कारवां पीछे छूट गया।कौन जानता था कि कुछ ही समय पहले आई अंग्रेज़ी मीडियम उनकी अंतिम फिल्म बन जाएगी।स्लमडॉग मिलेनियर और लाइफ ऑफ पाई,दो ऑस्कर विजेता फिल्मों कर चुके इरफान को खोना सिनेमा जगत के लिए बेहद दुख भरा है।प्रतिभा की खान,इरफान ने अपने हर किरदार,चाहे वह बॉलीवुड का हो या हॉलीवुड का,उन्होंने हमेशा अपने आप को बेहतर तरीके से पेश किया।भले ही बचपन एक छोटे से कस्बे में गुज़रा हो लेकिन बड़े सपनों का लोहा दुनिया ने मान लिया।
वहीं रोमांटिक किरदारों के सरताज कहे जाने वाले ऋषि कपूर के निधन से बेशक बॉलीवुड में एक युग का अंत हो गया।बेहद वर्स्टाइल एक्टर मैने जाने वाले चिंटू जी ने सिनेमा जगत में हर तरह के किरदार निभाए और सिर्फ निभाए ही नहीं बल्कि उन्हें अमर भी बना दिया।80के दशक में जब वह पर्दे पर आते तहलका मचा देते।फिर वह चांदनी हो,दीवाना,नगीना,प्रेम रोग, हीना या फिर बॉबी।कुछ समय पहले आई फिल्म कपूर एंड सन्स में दादा जी का किरदार हो या 2012 में आई अग्निपथ में विलेन का रोल,दोनों में ही वह श्रेष्ठ साबित हुए।फिल्मी किरदार में ही नहीं असल जिंदगी में भी वह खुशमिजाज थे।आज उनके नहीं होने से पूरा बॉलीवुड सदमे में है।अमिताभ बच्चन इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।दोनों की साथ में कई फिल्में आईं जो यादगार हो गई।साथ ही देश के तमाम राजनेताओं ने भी इसपर दुख जताया।इससे ही यह पता चलता है कि ऋषि कपूर साहब की क्या भूमिका रही फिल्मी जगत में।
यूं तो ऋषि साहब कई साल से कैंसर से जूझ रहे थे। स्थिति अचानक खराब होने पर 29 अप्रैल की शाम उन्हें मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी मृत्यु हो गई।आज मेरा नाम जोकर फिल्म में अपने पिता राज कपूर साहब के बचपन का रोल करते हुए जब वह यह गीत गाते हैं कि जीना यहां मरना यहां इसके सिवा जाना कहां।आज फिर यही पंक्ति याद आरही है।यह कपूर साहब के किरदार कि खूबसूरती ही थी जो दर्शकों के सामने उनके मुस्कुराते चेहरे के रूप में याद आ रही है।वाकई 2020 के शुरुआती दौर में ही ये अनहोनी बॉलीवुड को बहुत आघात की है।इसके बाद सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या ने पूरे बॉलीवुड को सदमे में डाले रखा। इन सभी अनहोनी के बाद उम्मीद की जा सकती है कि 2021 फिल्म जगत के लिए अच्छा साबित हो सके।

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