शादी और कैरियर के बीच सही चुनाव

शादी और कैरियर
79 / 100

शादी और कैरियर

शादी और कैरियर

जब उम्र सौ साल की होती थी तब गृहस्थ जीवन (शादी और कैरियर) की शुरुआत 25 वर्ष से हो जाती थी। अब जब कि मानव की औसत आयु 60 से 70 वर्ष को हो गयी है , तो गृहस्थ जीवन की शुरुआत 35 से 40 के बीच मे होने लगी है।

आज पुत्री दिवस के अवसर पर हमारे समाज की चिंता यही है कि बेटियों के प्रति समाज का नजरिया कैसा है ?बलात्कार, अपहरण, गंदी बातें समाज मे प्रचलित होना। इसका सब्ज़ी बड़ा कारण यही है कि सही समय पर युवाओ का विवाह न होना।

इसके लिए बहोत पहले से कुचक्र रचा जा रहा था। धीरे धीरे ही सही लेकिन उन लोगो का स्वार्थ सिद्ध होना शुरू हो गया, या यूं कहें कि जो लोग बेटियों को गलत नजर से देखते थे, उनके हाथो में शक्तियां आती गयी, और अपने हिसाब से कानून बनाना शुरू कर दिए। और आज स्थिति ये हो गयी कि ऐसे लोग समाज को दूषित करने का कुत्सित प्रयास सदैव कर रहे है।

यदि सही मायने में समाज मे बेटियों की रक्षा, सुरक्षा, और उनका मान वापस लाना है तो बेटे और बेटियों की शादी सही समय पर करा देना हर माता पिता का कर्तव्य होना चाहिए।

हम छमा चाहते है शायद मेरी बातों से असहमति कई लोग व्यक्त करें। लेकिन मन का सत्य यही है कि जब तक हम ऐसे निर्णय नही लेगे तब तक असामाजिक कृत्य होते रहेंगे।

कानून,मर्यादा, लज्जा, तभी तक रहता है जब तक उसे बचाने के लिए समाज आगे आता है। इसलिए सभी से करबद्ध निवेदन है कि बेटी और बेटो की शादिया समय पर करवाने के लिए कृत संकल्पित हो।

हमारा व्यक्तिगत अनुभव है कि जो भी बालक विद्याध्ययन में रत है, उसका प्रयास ये होना चाहिए कि 25 वर्ष की उम्र तक वो अपने लक्ष्य को प्राप्त कर ले। जो लोग इसके बाद भी प्रयास रत रहते है उनमे सिर्फ 10 % ही सफलता मिलती है, इसलिए ये बहाना न बनाया जाए कि अभी कैरियर पे ध्यान दे रहे है, शादी का बाद में सोचेंगे।

सच तो ये है कि ऐसे लोग अपने भविष्य के साथ साथ समाज को भी अंधकार में या यूं कहें की जान बूझकर अपनी कमियों को छुपाने के लिए कहते है कि नही अभी हमे कुछ बनना है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओ को आहत करना नही है। किंतु सत्य यही है कि युवाओ को सही जीवन प्रणाली के लिए वैवाहिक प्रक्रिया बहोत बड़ा कारक रहा है।

विवाह कोई मनोरंजन का साधन नही अपितु विवाह ,संस्कार है। और इसका यथोचित समय होना चाहिए। समय व्यतीत होने के बाद कोई भी कार्य उचित नही होता। इसलिए सभ्य समाज से यह अपेक्षा है कि समाज मे हो रहे दुष्कर्मो को ध्यान में रखते हुए बालक एवम बालिकाओ का समय से विवाह कर देना आवश्यक है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *