विलुप्त होता नागपंचमी का पर्व

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नागपंचमी

नागपंचमी एक महान पर्व

नागपंचमी: हमारे देश की संस्कृति एवम परम्पराओ, उत्सवों पर इस तरह का कुठाराघात हुआ है की आज के समय किसी को उत्सव मनाने का समय तक नही रह गया है। आखिर हम किस दौड़ में जा रहे है। कौन सी प्रतियोगिता को जीतने का संकल्प मन मे बनाये है।

कल 13 अगस्त शुक्रवार को नाग पंचमी का पर्व है । आज से 20 साल पहले बड़े ही धूम धाम से पूरे उल्लास के साथ हिन्दू समुदाय के लोग मनाते थे। बच्चे झूले का आनद लेते थे। बहोत ही प्रफुल्लित करने वाला मोहक दृश्य रहा करता था।

बड़े लोग नाग पंचमी के अवसर पर शिव मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करते थे। ये लोकरीति थी की नाग पंचमी के दिन जब तक भगवान शिव की पूजा नही कर लेते तब तक कुछ खाया पिया नही जाता था।

बच्चो को भी मना कर दिया जाता है। लेकिन वाह रे मानव तू इतना दौड़ लगाता गया कि आज सब कुछ पीछे छूट गया। वास्तव में दौड़ तूने नही लगाया। दौड़ तेरे दुर्भाग्य ने लगाया। और वास्तव में जीवन की जो खुशियां थी, उन खुशियों ने तुझसे किनारा कर लिया।

आज ये हालात है कि गली मोहल्ले में कही चले जाइये तो किसी को पता ही नही है की कल नाग पंचमी का पर्व है। अगर घर में बुजुर्ग न हो तो वास्तव में नही पता चल पता। किसी किसी घर मे यदि पर्व के बारे में न पता होगा तो कोई आश्चर्य नही।

क्यो की सबसे ज्यादा दिमागी हिन्दू है, और सबसे ज्यादा विकसित अपने को समझता है। जब की हकीकत ये है कि वो कुछ नही कर पाया। सिर्फ हिन्दू धर्म एवम हिन्दू विचारधारा का हनन एवम हिन्दू पर्व, उत्सवों का हनन किया। सिर्फ इसीलिए हिन्दुओ ने पढ़ाई की। नास्तिकता का बोध भी केवल हिन्दू को ही होता है।

कहा जा रहा है ये समाज। अपने बच्चो को विरासत में क्या देना चाहता है ? कुछ समझ मे नही आ रहा है। अभी भी समय है, सचेत हो जाइए, अन्यथा जीवन भर रोने के सिवा कुछ भी नही हासिल होगा।

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