लॉकडॉउन में ग्रामीण क्षेत्रों का हाल: कहीं बेपरवाह,कहीं बेहाल

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लॉकडॉउन में ग्रामीण क्षेत्रों का हाल: कहीं बेपरवाह,कहीं बेहाल

24 मार्च को जब देश में संपूर्ण लॉकडॉउन की घोषणा हुई,तब सबसे अधिक संकट ग्रामीण क्षेत्रों पर ही होने की आशंका थी।लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया यह बातें गलत साबित होती गई।शहर में आज जीना मुश्किल हुआ है।ऐसे में लोग पलायन कर गांव की तरफ भाग रहे हैं।यह समय ग्रामीण इलाकों में फसल कटाई और खेत जुताई का है। लॉकडाउन 2.0में ही इस बात पर पूरा ध्यान दिया गया और किसानों को इसकी छूट दी गई।
भारत के गांव आज भी छोटे दुकानों पर आश्रित है जिससे आमजन को तकलीफ की गुंजाइश कम है।समस्या शुरू तब हो रही है जब फसलों को शहरों में लाकर बेचने की बारी आ रही है।सब्जियां आज बेहद कम कीमतों में मिलने के पीछे यह बड़ा कारण है।किसानों के अनुसार खरीफ की फसल अच्छी हुई है,अब इंतजार है बाज़ार के खुलने का।भारत की 60% अर्थव्यवस्था के पीछे कृषि है।यह संतोषजनक बात है कि कृषि का काम किसी भी तरह से बाधित नहीं हुआ है और इसलिए आर्थिक स्थिति को सुधारने का मौका है।
लॉकडाउन के दौरान मनरेगा योजना से भी ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों के लिए रोजी रोटी का आसरा बना हुआ है। काम की तलाश में बाहर जाने के बदले उन्हें अपने गांव में ही काम मिल जा रहा है।मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी 182 रुपए से बढ़ाकर 202 कर दी गई है।इसके पीछे का कारण यही है कि लॉकडाउन जब शुरू हुआ तो सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र में मजदूरी करने वाले लोगों को हुई।कई जगह भूखे मरने की नौबत थी।शहर में फंसे मजदूरों को विभिन्न संस्थाओं के जरिए खाना मिल जा रहा था। गांव में इस तरह की व्यवस्था कहां?ऐसे में मनरेगा बहुत कारगर साबित हुआ।सरकार का भी पूरा ध्यान मनरेगा पर रहा है।विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से प्रधानमंत्री इसी विषय को लेकर बात करते भी देखे गए।
इन सभी बातों को अगर एक तरफ़ कर लॉक्डाउन के प्रभाव को देखा जाए तो राशन की दुकानों पर न तो सामाजिक दूरी का पालन हो रहा, न सनेटाइजेशन पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन इसके लिए दिन रात प्रयासरत है।इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों से डॉक्टर भी गायब है। मास्क और सफाई पर भी लापरवाही बरती जा रही है।वहीं कुछ ऐसे भी गांव सामने आ रहे हैं जहां ग्रामीणों ने स्वयं पूरे गांव के घेर दिया है जिससे कोई गांव के अंदर प्रवेश न कर सके।बुजुर्ग भी सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों ने गांव को भी अपने चपेट में लेना शुरू कर दिया है।लेकिन कोविड 19की महामारी ने गांव के महत्व को साफ कर दिया है।जब भी भारत में आर्थिक संकट आया है,सबकी नजरें गांव पर टिकी है।आने वाले सालों में यही होगा।इससे गांव में रोजगार के अवसरों के बढ़ने की संभावना है।कृषि भारत के लिए हमेशा से मजबूत स्तंभ के रूप में रही है।यह पुनः स्थापित होगी।

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