लॉकडॉउन ने डाली आर्थिक दीवार पर दरार

कोरोना
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लॉकडॉउन ने डाली आर्थिक दीवार पर दरार

लॉकडॉउन

 

पिछले 40 साल में पहली बार देश में आर्थिक मंदी (लॉकडॉउन )  के बादल साफ मंडराते नजर आ रहे हैं। कोरोना वायरस की महामारी को रोकने का एकमात्र उपाय लॉकडॉउन ही है।देशभर में 24मार्च से ही लॉकडाउन है।24मार्च के बाद आज देश को बन्द हुए 55दिन से अधिक हो गए।भारत की 5 फीसदी जीडीपी लुढ़ककर 1.7होने के कगार पर है।इसका कारण व्यापार,वाणिज्य,रेल,परिवहन,यातायात,उत्पादन,आयात,निर्यात पर लगी बंदी है।हालांकि सीआईआई की रिपोर्ट में यह बताया जा रहा कि स्थिति अभी और खराब हो सकती है जो कि गिरकर -0.9फीसदी तक जाने की संभावना है।अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि जून तक हालात नहीं सुधरे तो आने वाले कई सालों तक इसकी रिकवरी करनी पड़ सकती है।पहले से ही देश की आर्थिक दीवार पर कई दरारे हैं उसपर से कोविड 19 की महामारी एक कड़ा प्रहार है।2019 में ही ऑटोमोबाइल और रियल इस्टेट समेत लघु उद्योगों में सुस्ती देखी गई।जिससे निवेश के जरिए सरकार इसे रफ्तार देने की कोशिश कर रही थी।अब इसमें तेज़ी की सारी संभावनाएं खत्म होती ही दिख रही हैं। लाकडाउन में लोग घरों में हैं और बाज़ार में न तो उत्पाद है और न मांग।जरूरत के सामानों की छोटी दुकानें ही आपूर्ति कर रही हैं बाकी ताले लटक रहे।
लॉकडाउन की घोषणा,सरकार ने इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए की है।जिससे लोग अपने घरों में रहेंगे,सामाजिक दूरी बनी रहेगी और संक्रमण कम फैलेगा।एक तरफ़ यह कोरोना वायरस से लडने में कारगर तो साबित हो रहा है लेकिन देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसके खासे असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।इसी का परिणाम है कि लॉकडाउन 3.0 के अंत तक संक्रमण के प्रभाव पर आधारित क्षेत्रों को ज़ोन में बांटा जाने लगा और कुछ छूट दी जाने लगी।18 मई से जब देश लॉकडाउन के चौथे चरण में गया तब देश में ज़ोन के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए।कुछ नियमों के साथ देश के अर्थ को गति देने का प्रयास भी शुरू हुआ।जिसमें शराब की दुकान खोलने,लघु उद्योगों में उत्पादन आदि शामिल हैं।इस बंदी का सबसे अधिक प्रभाव लघु उद्योगों और असंगठित क्षेत्रों पर ही पड़ा है। लॉकडाउन 4.0 की घोषणा के साथ प्रधानमंत्री ने राहत पैकेज की भी घोषणा की।उस दौरान उनका सारा ध्यान देश की आर्थिक स्थिति पर ही था।इस काल में वही छोटी दुकानें और उद्योग हमारी मांग की आपूर्ति का साधन बने हैं।आशय स्पष्ट है,आने वाले समय में भारत की मंशा लघु उत्पादकों को बढ़ावा देने की है।इससे आयात में कमी कर निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।महामारी के काल में पीपी किट और मास्क का उत्पादन कर भारत ने दुनिया के सामने अपने सामर्थ्य को सिद्ध भी कर दिया है।आने वाला भारत का आर्थिक भविष्य लोकल के प्रति वोकल बनने में है।जिस तरह से दुनिया चीन के बहिष्कार पर अड़ी है उस समय भारत के तरफ सभी की नजरें टिकी हैं।
कोविड 19 ने देश में कई नए अध्यायों को भी जोड़ा है।जिसमें वर्क फ्रॉम होम सबसे बड़ा है।इससे पहले इस तरह की बातें देश में देखने को नहीं मिली थी।आज ज्यादातर आईटी कंपनियां इसी फार्मूले को अपना रही है।इन सभी बातों से यह तो स्पष्ट है कि इस महामारी के समाप्त होने के बाद कई सारी आधुनिक तकनीक भारत को आर्थिक तौर पर मजबूती देंगी।

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