मेजर ध्यानचंद जी हॉकी के जादूगर

मेजर ध्यानचंद
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मेजर ध्यानचंद

मेजर ध्यानचंद

आइए आज एक साधारण से राजपूत परिवार में जन्म लिए राजपूत कुलभूषण मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी के जन्म जयंती पे भारत सरकार का घोषित रास्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त
पे जानिए विस्तार से कुछ विशेष बातें..।।

बात उस समय की है, की इन्हें 1935 ई.में न्यूजीलैंड आने का निमंत्रण मिला न्यूजीलैंड हॉकी एसोसिएशन मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी के खेल से सीखकर करना चाहता था..अपनी घरेलू हॉकी को काफी मजबूत..।।

फिर न्यूजीलैंड जाते हुए बीच में ही मिला ऑस्ट्रेलिया स्टेट हॉकी एसोसिएशन का ऑस्ट्रेलिया आने का इनविटेशन भारतीय हॉकी एसोसिएशन ने न्यूजीलैंड हॉकी एसोसिएशन से ली ऑस्ट्रेलिया में मैच खेलने की अनुमति मांगा..।।

भारतीय हॉकी टीम ने शुरू में ऑस्ट्रेलिया में खेले गए..चार मैच- एडिलेड के सिटी हॉल में भारतीय हॉकी टीम की मुलाकात हुई सर डॉन ब्रैडमैन से – सर डॉन ब्रैडमैन ने भारतीय हॉकी टीम के साथ क्लिक करवाए फोटो ~ एडिलेड में मैच देखने के बाद
मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी के खेल से काफी प्रभावित होकर सर डॉन ब्रैडमैन ~ मुलाकात करते हुए बोले थे कि मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी हॉकी में ऐसे गोल करते है जैसे क्रिकेट में हम रन बनाते हैं ~भारतीय हॉकी टीम के 1926 ई. के सफलतम न्यूजीलैंड दौरे के बाद और 1928 ई.में एम्सटर्डम ओलंपिक गोल्ड मेडल के विजय साथ ही..।।

1932 ई. में लॉस एंजिल्स ओलंपिक में अमेरिका के खिलाफ ओलंपिक और वर्ल्ड रिकॉर्ड को स्थापित करते हुए 2 दूसरी बार लगातार गोल्ड मेडल का जितना मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी और इनके छोटे भाई राजपूतकुलभूषण रूप सिंह जी की जादू भरी हॉकी और भारतीय हॉकी टीम के अद्भुत टीम मैनजमेंट कि चर्चाएं चारों ओर दुनिया में होने लगे थे..।।

ये सब चर्चाओं के बीच न्यूजीलैंड हॉकी एसोसिएशन 1926 ई. के भारतीय हॉकी दौरे की सफलता के बाद लगातार इस विषय पर विचार विमर्श किया था.. 1 एक बार फिर मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी के साथ भारतीय हॉकी टीम को न्यूजीलैंड के दौरे पर आमंत्रित किया जाए क्योंकि न्यूजीलैंड उस समय अपनी घरेलू हॉकी को मजबूत और विकसित करने का कार्य में लगा हुआ था..।।

और न्यूजीलैंड के ऑफिसर्स को लगता था कि यदि एक बार फिर से मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी के साथ भारतीय हॉकी टीम न्यूजीलैंड का दौरा करेगी तो उसकी घरेलू हॉकी और युवा खिलाड़ियों को मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी और भारतीय हॉकी टीम से बहुत कुछ सीखने के लिए मिलेगा..।।

और इसी कारण को पूरा करने के लिए बहुत ही मंथन के बाद न्यूजीलैंड हॉकी एसोसिएशन ने बंगाल हॉकी एसोसिएशन से इस संबंध में संपर्क किया..।।

उसके बाद बंगाल हॉकी एसोसिएशन ने भारतीय हॉकी संघ को न्यूजीलैंड हॉकी एसोसिएशन की बात से परिचय दिलवाया..।।

फिर भारतीय हॉकी संघ के ऑफिसर्स को भी लगा की यह सही अवसर है जब हम 1936 ई. के बर्लिन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम को तैयार करने के लिए इस अवसर का फायदा ले..।।

और फिर 1935 ई. में भारतीय हॉकी संघ ने न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारतीय हॉकी टीम भेजने के लिए सहमति प्रदान कर दिया..।।

भारतीय हॉकी संघ ने इस दौरे के लिए टीम चयन हेतु कोई विधिवत चयन प्रक्रिया को न अपनाते हुए एक चयन कॉमिशन का गठन कर दिया जिसमें पंकज जी बंगाल से प्रोफेसर जगन्नाथ पंजाब से मेजर तेने साहब आर्मी से डॉक्टर ए. पी. चटर्जी साहब उत्तरप्रदेश से और एमएन मसूद मंडावर साहब को रखा गया..।।

इस कॉमिशन ने उस समय के प्रोविंशियल हॉकी एसोसिएशन से खिलाड़ियों के नाम इस दौरे पर जाने के लिए बुलवा लिए और फिर इस चयन समिति ने उन्ही नामों में से चयन करके इस दौरे के लिए भारतीय हॉकी टीम का चयन करते हुए खिलाड़ियों के नामों को डिक्लेअर कर दिए..।।

इस टीम में गोल कीपर टॉमी ब्लेक और एन मुखर्जी साहब ~ फुल बैक ~ मो हुसैन जी , पी दास जी और रशीद अहमद जी हाफ लाइन – ई नेस्टर, एम एन मसूद जी, एम जे गोपालन जी ,मो नईम जी फॉरवर्ड लाइन ~ -शाहबुद्दीन,लौरी डेविडसन
मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी इनके छोटे भाई
,रूप सिंह जी नवाब ऑफ मंडावर , बी पी अग्निहोत्री जी, और रिचर्ड कार , हेरबैल सिंह जी सेलेक्ट थे..।।

मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी इस दौरे के लिए भारतीय हॉकी टीम का कैप्टन बनाया गया..।।

बेहराम डॉक्टर ,और पंकज जी ऑफिसर्स के रूप में इस टीम के साथ गए..।। भारतीय हॉकी टीम के सभी खिलाड़ी 13 अप्रैल 1935 ई. को मद्रास में इकट्ठे हुए और उसी दिन AMUC फील्ड पे मद्रास एकादश के खिलाफ मैच हुआ..।।

इस मैच में भारतीय हॉकी टीम ने बड़ी जीत से मद्रास एकादश को 5 पांच के मुकाबले 2 दो गोलों से हरा दिए..।।

और इसी दिन ही भारत के परंपरा के अनुसार नया वर्ष की शुरुआत हो रही थी ..।।

इसलिए मद्रास में 4 चारों ओर खुशी,उल्लाश, मस्ती का वातावरण था..।। भारतीय हॉकी टीम मद्रास में बोसोतीस होटल में रुकी हुई थी और यहां उसी दिन एमएन मसूद साहब को इस दौरे पर जा रही भारतीय हॉकी टीम का उप कप्तान चुना गया..।। फिर भारतीय हॉकी टीम रात कोलंबो के लिए चल दिया ..और वह 15 अप्रैल 1935 ई. को कोलंबो टीम पहुँच गए..।।

जहां पे फोर्ट रेलवे स्टेशन पर कोलंबो के मेयर ने भारतीय हॉकी टीम का नागरिक अभिनंदन किए.. और भारतीय हॉकी टीम ने कोलंबो में दो मैच खेले और दोनों ही मैचों में लगातार मजबूत जीत दर्ज किया..।।

भारतीय हॉकी टीम 17 अप्रैल 1935 ई. को पानी के जहाज से एस एस लार्गस से कोलोबो से फ्रेमंटल ऑस्ट्रलिया के लिए रवाना हो गए..।। फिर समय ऑस्ट्रेलिया के स्टेट हाकी एसोसिएशन का निमंत्रण भारतीय हॉकी संघ को मिला की आपकी टीम ऑस्ट्रेलिया होते हुए न्यूजीलैंड पहुंच रही है तो 4 चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला आयोजित की जा सकती हैं..।।

जिससे हमारे देश के युवा खिलाड़ियों को बहुत कुछ सीखने के लिए मिल सकता है..लेकिन भारतीय हॉकी संघ के सामने शंका इस बात को लेकर था.. की भारतीय हॉकी टीम न्यूजीलैंड के हाकी एसोसिएशन के निमंत्रण पर खेलने जा रही थी.. और वह बिना न्यूजीलैंड हाकी एसोसिएशन की सहमति लिए बिना अपनी सहमति नहीं दे सकते थे.. और इसलिए भारतीय हॉकी संघ ने इस बात की सूचना न्यूजीलैंड हॉकी एसोसिएशन को दिए कि इस प्रकार का प्रस्ताव ऑस्ट्रेलियन स्टेट हॉकी एसोसिएशन की ओर से हमें प्राप्त हुआ है..।।

फिर इस प्रस्ताव पे न्यूजीलैंड हॉकी एसोसिएशन ने तुरंत ही भारतीय हॉकी टीम को ऑस्ट्रेलिया में भी मैचों को खेलने की आर्डर दिया..।।

फिर भारतीय हॉकी टीम 27 अप्रैल 1935 ई. को सुबह सुबह- फ्रेमांटल ऑस्ट्रेलियन बंदरगाह पर दस दिन की थकान भरी लबी समुद्री यात्रा करते हुए पहुंचती है..।। जहां वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया हॉकी एसोसिएशन के पदाधिकारी उनका विधिवत स्वागत करते हैं और शीघ्र वहां से भारतीय हॉकी टीम टैक्सी और बस से पर्थ के लिए रवाना हो जाती है जहां उसी दिन भारतीय हॉकी टीम वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया हॉकी टीम के साथ मैच खेलती है जिसमें भारतीय हॉकी टीम 11 ग्यारह के मुकाबले 2 दो गोलों से विजय दर्ज करते हुए अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे की धमाकेदार शुरुआत करती है..।।

इस मैच में मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी 6 छः गोल करते है। रात में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया हॉकी एसोसिएशन रात्रि भोज का आयोजन किया जाता है..और फिर अगली सुबह भारतीय हॉकी टीम एडिलेड के लिए रवाना हो जाती है..।। फिर एडिलेड पहुंचने पर भारतीय हॉकी टीम का एडिलेड शहर के मेयर द्वारा नागरिक अभिनंदन रखा जाता है ,और इस नागरिक अभिनंदन को संबोधित करते हुए भारतीय हॉकी टीम के मैनेजर पंकज जी उस समय के महान क्रिकेटर डॉन ब्रैडमैन से मिलने की इच्छा जाहिर करते हैं .. जो उस समय एडिलेड में ही थे तत्काल ही वहां के मेयर ने भारतीय हॉकी टीम के इस अनुरोध के साथ कि भारतीय हॉकी टीम आपसे मिलने की इच्छा रखती है तुरंत एक दूत के साथ संदेश डॉन ब्रैडमैन को भेजते है ..और देखते ही देखते थोड़ी देर में डॉन ब्रैडमैन सिटी हॉल में भारतीय हॉकी टीम से मुलाकात करने पहुंच जाते हैं..।।

फिर भारतीय हॉकी टीम भी डॉन ब्रैडमैन से मुलाकात करके अत्यंत प्रसन्न होती है डॉन ब्रैडमैन सभी भारतीय हॉकी टीम खिलाड़ियों के साथ ग्रुप फोटोग्राफ कराते हैं..।।

2 मई 1935 ई. को भारतीय हॉकी टीम एडिलेड क्रिकेट ग्राउंड पर साउथ ऑस्ट्रेलिया एकादश के साथ टेस्ट मैच खेलती है जिसमें भारतीय हॉकी टीम साउथ ऑस्ट्रेलिया को 10 दस के मुकाबले एक गोल से परास्त कर देती है ..और इस मैच में 6 छः गोल मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी की स्टिक से निकलते हैं और अन्य दूसरे गोल में भी मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी द्वारा फेके हुए पास अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं..।।

इस मैच को देखने के लिए स्टेडियम में खुद ही सर डॉन ब्रैडमैन उपस्थित रहते हैं ..और मैच समाप्ति के बाद मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी खेल से प्रभावित और काफी इम्प्रेस होकर मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी मुलाकात करते है और कहते है की मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी आप हॉकी में ऐसे गोल करते हैं जैसे हम क्रिकेट में रन बनाते हैं..।।

फिर सर डॉन ब्रैडमैन की यह टिप्पणी आज 8 आठ दशक बाद भी सदैव मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी स्थापित किर्तिमान ( बम्पर रिकॉडर्स ) को याद करते हुए कहे जाते हैं..।।

और ऐसा कहा जाता है कहे गए या बोले गए शब्द कुछ समय बाद अपना अस्तित्व ,खो देते है लेकिन
मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी के लिए महान क्रिकेटर सर डॉन ब्रैडमैन द्वारा कहे गए शब्द आज भी महा अमर है..क्योंकि यह बात किसी साधारण खिलाड़ी ने नहीं किए थे.. बल्कि उस समय के एक महान क्रिकेटर ने उस समय के महान हॉकी खिलाड़ी के ऊपर किए थे..।।

और इसलिए इस बात का आज तक अपना महत्व बना हुआ है..।। भारतीय हॉकी टीम अपने अगले पड़ाव एडिलेड से मेलबॉर्न 4 मई 1935 ई. को पहुंच जाती है जहाँ पे विक्टोरिया के खिलाफ अपना हॉकी मैच खेलती है..।। और उस मैच में 15 पंद्रह के मुकाबले 4 चार गोलों से पराजित करते हुए इस दौरे कि लगातार 3 तीसरी जीत दर्ज किया था..।।

फिर ऑस्ट्रेलिया दौरे का चौथा और अंतिम मैच भारतीय हॉकी टीम मेट्रोपॉलिटिन एकादश के खिलाफ सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर खेलती है यहां वह 11 ग्यारह के मुकाबले 4 चार गोलों से जीत दर्ज करते हुए अपने प्रथम चरण के ऑस्ट्रेलिया दौरे का शानदार समापन करती है ..और मौन गैन यूई पानी के बड़े जहाज से न्यूजीलैंड के वेलिंगटन टाउन के लिए रवाना होती है जहाँ 11 मई 1935 ई. को पहुंचती है..।।

फिर भारतीय हॉकी टीम 1935ई. ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड दौरा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ओलंपिक में मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी और उनकी भारतीय हॉकी टीम ने जो अद्भुत और चमत्कारी खेल का प्रदर्शन किया और दुनिया पर जो उसकी छाप छोड़ी यह दौरा उसकी का परिमाण था जब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी खेल को देखने के लिए और उनसे खेल को सीखने के लिए इस दौरे पर आने के लिए भारतीय हॉकी टीम को आमंत्रित किया गया..।।

यहां यह भी तथ्य उल्लेखनीय है कि मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी के कारण ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड 2 दोनों देशों ने पहले पहल भारतीय शैली की हांकी से अपनी हाकी को विकसित किए.. फिर फिर धीरे धीरे भारतीय हॉकी शैली में यूरोपियन टेक्निक कि हाकी का बारीकी से मिक्सिंग किया जिसका असर आज भी इन देशों को हॉकी खेलते हुए देखा जा सकता है..।।

साथ ही भारतीय हॉकी टीम मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी के कारण अपनी समुद्री यात्रा को करते समय जिन जिन देशों में पहुंचकर अपनी हाकी को खेला उन देशों में प्राकृतिक रूप से ही हॉकी का विकास हुआ इसका सबसे बड़ा उदाहरण जापान है..।।

और साथ ही श्रीलंका ने भी उस समय अपनी हॉकी को काफी हद तक भारतीय हॉकी को देख देख विकसित किया..।। मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी के कारण ..।।

भारतीय हॉकी टीम ने भी इस दौरे का भरपूर लाभ उठाते हुए 1936 ई. में बर्लिन टाउन में आयोजित होने वाले ओलंपिक की पूर्व तैयारी के रूप में देखें और कैप्टन मेजर ध्यानचंद सिंह बैस जी ने इस दौरे को बारीकी से मंथन किए और वे अपनी पूरी टीम को एक कॉम्बिनेशन बना कर टीम मैनेजमेंट के साथ सफलता के सूत्र में बांधने में सफल हुए..।।और जिसका सीधा लाभ भारतीय हॉकी टीम को 1936 बर्लिन ओलंपिक खेलों की तैयारियों में मिला..।।

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