मानव स्वभाव क्या है?

मानव का स्वभाव
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मानव

मानव

एक सभा मे लोगो से बातचीत करने के दौरान इस विषय पर चर्चा हुई कि मानव स्वभाव कैसा होना चाहिए? या मानव के स्वभाव को हम कैसे देखे ?
चर्चा पर बहस होनी शुरू हुई, बातो बातो में बात यहाँ तक पहुच गयी कि हर व्यक्ति का अपना स्वभाव होता है। फिर बात ये आयी कि हर व्यक्ति का अपना स्वभाव कैसे हो सकता है ? मानव स्वभाव के पीछे कौन से कारक उत्तरदायी होते है ? जब कोई जीव मानव रूप में जन्म लेता है तो उसके स्वभाव की शुरुआत उसके पालन पोषण से शुरू हो जाता है। उसके खान पान का स्वभाव, उसकी भाषा शैली का स्वभाव, उसके रहन सहन का स्वभाव सब कुछ उसके पालन पोषण पर निर्भर करता है।
हम अपने आस पास बहोत से अन्य जीवों को देखते है, पालतू जानवरों को देखिए वो अपना स्वभाव नही बदलते। हौदा में भोजन करना, रंभाना, मल मूत्र का उसी स्थान पर त्याग करना। उनका अपना स्वभाव है। वो अपने स्वभाव में परिवर्तन नही लाते।
मानव का स्वभाव भी कुछ इसी प्रकार का होता है। लाड़ प्यार से उनका पालन पोषण होता है। बहोत ध्यान रखा जाता है। बच्चे के आस पास या यूं कहें उनके माता पिता, दादा दादी, ताऊ ताई आदि सब बच्चो को बहोत ही स्नेह से पालते है।

फिर मानव का स्वभाव यही तो होना चाहिए। दया, त्याग, प्रेम, स्नेह, करुणा,। यही तो मानव का स्वभाव होना चाहिए। और हम आपको बता रहे है कि प्रत्येक जीव को अपना स्वभाव नही बदलना चहिये।

सिंह अपना स्वभाव बदल देगा तो उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। सर्प अपना स्वभाव छोड़ देगा तो वो जीवित नही रह पाएगा। इसी प्रकार से मानव को भी अपना स्वभाव नही बदलना चाहिए। मानव के अंदर दया, दान, धर्म, त्याग, बलिदान, प्रेम, स्नेह होना ही चाहिए। यही तो मानव स्वभाव है।

किंतु दुर्भाग्य की मानव अपने मानव स्वभाव को बदलने की जिद कर लेता है। वो हिंसात्मक, अत्याचारी, लोभी, कामी, क्रोधी, मद्यपान, विलासी बन जाता है। जिससे आज मानव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

मानव को ही नही, प्रकृति ने जिसे जिस स्वभाव में ढाला है। उस जीव को अपने स्वभाव का परित्याग नही करना चाहिए।
फल अगर अपने गुणों को बदल दे तो क्या होगा ? सब्जियां अगर अपने गुण और स्वाद को बदल दे तो क्या होगा?

कुछ भी अच्छा नही होगा। इसी तरह मानव को अपना मानव स्वभाव अर्थात दया, करुणा, स्नेह, प्रेम का परित्याग नही करना चाहिए।
शिवा कांत पांडेय

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