भारत- चीन मसला: आज की चुनौती नहीं,दशकों पहले से अनसुलझी पहेली

भारत
80 / 100

भारत

भारत– चीन मसला: आज की चुनौती नहीं,दशकों पहले से अनसुलझी पहेली

 

भारत :  1962 के युद्ध के बाद नियंत्रण रेखा से तनाव की खबरे आती थी लेकिन इतनी बड़ी झड़प कभी देखने नहीं मिली।हां 1962 के बाद 1975 में एलएसी पर गोलीबारी हुई जिसमें चार भारतीय जवान शहीद हुए थे।इस पूरे प्रकरण को समझने के यह समझना ज्यादा जरूरी है कि आखिर गलवान घाटी क्या है और यह भारत के लिए इतना क्यों जरूरी है।

क्या है गलवान घाटी
गलवान घाटी लदाख में एलएसी पर स्थित है। बगल में गलवान नदी बहती है।यह उस अक्साई चिन से सटा है,जिसे चीन ने अपने कब्जे में ले लिया है। गलवान नदी काकोरम दर्रे के पूर्वी छोर समांगलिंग से निकलती है।फिर पश्चिम में बहते हुए श्योक नदी में मिल जाती है।यह पूरा इलाका रणनीतिक रूप से भारत के लिए काफी अहम है।भारतीय सैनिक नाव द्वारा इस क्षेत्र में गश्त करते हैं,ताकि चीन के अतिक्रमण को रोका जा सके।इस नदी का नाम गुलाम रसूल गलवान के नाम पर रखा गया है।रसूल लेह के रहने वाले थे और उन्होंने है इस नदी को खोजा था।1899 में इस नदी का पता लगाया जिसके बाद उनके नाम पर इसका नाम गलवान रखा गया।1962के युद्ध में भी गलवान एक प्रमुख जगह में से एक था।

स्वतंत्रता के बाद 1956से ही चीन का दावा इस क्षेत्र में दिखाई देने लगा और धीरे धीरे 1962में यह युद्ध में परिणित हुआ।पीछले एक महीने से इस तरह की बिसों झड़प की सूचनाएं सामने आ रही थी जो कि 16जून को 20सैनिकों की मृत्यु में तब्दील हो गई।अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि इसमें चीन के भी 35जवान हताहत हुए हैं।विगत 1993,1996,2003,और 2005तक दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रणरेखा के प्रोटोकॉल तय किए गए लेकिन हरबार पीठ पर छुरा ही भोंकने की गद्दारी सामने आती है।
वर्तमान विवाद के कई कारणों में से एक भारत द्वारा एक दशक पहले एक सड़क पर काम शूरू किया गया है जो डीबीओं को डरबुक और थेंस से जोड़ेगी और मौजूदा सड़कों के जरिए लेह से संपर्क भी जोड़ा जा सकेगा। बीआरओ की योजना के तहत सड़क श्योक नदी के किनारों के साथ चलती।कुछ साल पहले नदी के पश्चिम किनारे पर पहाड़ों की दीवारों पर सड़क का निर्माण शुरू हो गया।चीन ने भी 62के युद्ध का कारण शिंजियांग और तिब्बत के बीच सड़क निर्माण था।चीन अब इसे जी219 राजमार्ग कहता है।इस सड़क का 179किमी हिस्सा अक्साई चिन से होकर गुजरता है जो कि भारत का क्षेत्र है।इसका प्रयोग चीन पाकिस्तान से व्यापार में करता है।
इन विवादों के बढ़ने का कारण जम्मू कश्मीर को यूटी का दर्जा मिलना भी है जिससे चीन को अब लगने लगा है कि उसकी दाल नहीं गलने वाली।विगत दिनों में देश में जिस तरह के विरोध सामने आए जिनका देश से कोई खास संबंध नहीं था उसमे जाहिर है की चीन का हाथ था।एक तरफ नेपाल द्वारा बहस की स्थिति उत्पन्न करने में भी चीन सक्रिय है।
ऐसी हालत में देश को एकजुटता का परिचय दे चीन को आर्थिक और राजनीतिक चोट देनी चाहिए।जिस तरह से दुनिया चीनी वायरस से संघर्ष कर रही है उसमे यह साफ है कि चीन को अब भारतीय ही नहीं बल्कि वैश्विक विरोध भी झेलना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *