भारत के जवान:जीवंत उदाहरण

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भारत के जवान:जीवंत उदाहरण

पाकिस्तान हो या चीन

पाकिस्तान हो या चीन,चाहे टक्कर किसी से भी हो भारत माता के लाल हमेशा सीमा पर डटे मिलते हैं।यूं ही नहीं कहा जाता कि भारतीय सेना आत्मा है देश की।यही नहीं बल्कि दुश्मन इनका नाम सुनते खौफ खाते हैं।क्योंकि अगर ऐसा न होता तो हर बार पीठ पर छुरा न घोपते हमारे पड़ोसी।पाकिस्तान से तो आए दिन इस तरह की वारदात सुनने मिलती है।वहीं रेड ड्रैगन के नाम से मशहूर चालबाज चीन भी कुछ कम नहीं।1956से लेकर आजतक झड़प का सामना सीना तानकर करती आयी है भारतीय फौज।यह चीन अच्छे से समझता भी है।1962 में भारत की अस्मिता से कौन वाकिफ नहीं है,फिर भी जिस शौर्य के साथ भारत के सपूतों ने अपनी बहादुरी का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया जिससे कि पूरी दुनिया की आंखे फटी रह गई।भले ही भारत युद्ध हार गया हो लेकिन उसकी सेना पीछे नहीं हटी और न पीठ दिखाई।आज एकबार फिर से आस्तीन के सांप चीन ने धोखेबाजी का परिचय दिया।जिसमें देश ने अपने 20जवानों की बलि दी।लेकिन जब एक जवान शहीद होता है तो केवल एक व्यक्ति नहीं मरता,वह अपने साथ एक वीरगाथा छोड़ जाता है और सिर्फ इतना कहता है कि बस इतना याद रहे एक साथी और भी था।यही फर्क होता है एक आम नागरिक और एक जवान में।जब एक जवान की शहादत की सूचना उसके घर आती है,वहां मातम का माहौल नहीं होता बल्कि एक बूढ़ा पिता,एक अधमरी मां,बिलखती बेवा पत्नी अपने दूसरी संतान को भी एक सैनिक कि वर्दी में देखना चाहता है।जब एक शहीद का शरीर उसके गांव घर पहुंचता है तो तिरंगे में लिपटे उस वीर को सलामी देने सारा जवार उमड़ पड़ता है।तिरंगे लहराते, आंखों में आंसू और जुबान पर ‘वीर जवान अमर रहे’।
विगत कुछ वर्षों में बार बार देश की छाती चीर देने वाले ऐसे उदाहरण पेश हैं जो दुश्मन को दहला देने वाली है। जिनकी उंगली पकड़कर संतान चलना सीखती है,जिस पिता के होने से तमाम दर्द दूर हो जाते हैं,जब वह पिता तिरंगे में लिपटे चले आ रहे हों!उस वक़्त एक संतान पर क्या गुजरती है,इसका अंदाजा लगाना असंभव है।मगर, भारत के फौजी की बेटियां ऐसी नहीं।आंखों में आंसू होते हैं लेकिन हिम्मत की कमी नहीं होती।2015में कश्मीर में कर्नल मुनींद्र नाथ राय को आतंकियों ने निशाना बनाया था।तब उनकी11साल की बेटी ने गोरखा रेजिमेंट का नारा लगाया था।जिसे वहां के मौजूद सभी जवानों ने दोहराया।आमतौर पर एक मां को करुणा और प्रेम की मूर्ति कहा जाता है।मातृत्व मां से ही है।लेकिन जब उस मां का बच्चा देश को न्योछावर हो,तो उसकी क्या प्रतिक्रिया हो।लेकिन ये भारत की मातृशक्ति है जनाब!शहीदएआज़म की मां ने जिस तरह अपने लाल की शहादत पर आंसू नहीं बहाए।वैसे ही श्रीनगर के पास माचछल सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों की गोलीबारी का जवाब देते पंजाब के गुरदासपुर के शहीद राजिंदर सिंह का शव जब घर पहुंचा तो सभी की आंखों में आंसू भर आए।क्यूंकि बेटा तो देश को समर्पित कर मां ने दुनिया के सामने मजबूत कलेजे को सामने रखा।किसी ने भी न कभी देखा और ना ही कभी सुना होगा कि एक मां अपने बेटे की अंतिम यात्रा में उसको कंधा देते हुए भारत माता की जय करते आगे बढ़े।एक सात महीने का बच्चा जो ठीक से अपने पिता से घुला मिला भी नहीं,वह मुखाग्नि दे रहा हो।

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जिस तरह से एक सैनिक वृद्ध होकर भी जवान कहलाता है उसका परिचारक बने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत अरोड़ा।हाल फिलहाल में लेफ्टिनेंट अरोड़ा का एक वीडियो सामने आया जिसमें वह नाचते गाते नजर आए। 1971 के भारत पाक युद्ध में उनकी भूमिका से भला कौन अपरिचित है। 90वर्ष की आयु में भी अरोड़ा साहब जीवंत होने की अनुभूति कराते हैं।वह देशवासियों को यह संदेश देते हैं कि यह उदासी हमेशा नहीं रहने वाली,खाओ पियो और खुश रहो।यही है एक जवान का जीवन,अपनी ही धुन में मस्त,बेखौफ और जिंदादिल।

 

 

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