बाबा केदार के सच्चे भक्त

बाबा केदार के सच्चे भक्त
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केदार

बाबा केदार के सच्चे भक्त

भगवान शिव (केदार) के विभिन्न स्वरूपों के बारे में हमने पढ़ा और सुना होगा।उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम की अनुकम्पा से भला कौन परिचित नहीं होगा।द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक केदारनाथ धाम की मान्यता है कि जो यहां सच्ची श्रद्धा लेकर आता है, भगवान उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं और वह कभी खाली हाथ नहीं जाता।ज्योतिर्लिंग का अर्थ ही होता है,शिव का वह स्वरूप जिसमें उनकी ज्योति विद्यमान होती है।
आज श्रद्धा और भक्ति की कहानी भगवान और भक्त को एक दूसरे का पूरक साबित करेगा।साथ ही आपके केदारनाथ धाम पर आस्था को और बढ़ा देगा।केदारनाथ ज्योतिर्लिंग को जागृत महादेव कहते हैं।अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इस शिवलिंग की आराधना की थी।जो भी महादेव के दर्शन के लिए आस्था लियेआता है,महादेव उसे जरूर दर्शन देते हैं।
इस बारे में एक बड़ी रोचक कहानी है।एक बार एक शिव भक्त पैदल केदारनाथ की यात्रा पर निकला।रास्ते में जो भी मिला वह उससे केदारनाथ धाम का रास्ता पूछ शिव का ध्यान कर उस दिशा में आगे बढ़ता जाता।मंदिर तक पहुंचते पहुंचते कई महीने बीत गए।मंदिर साल के 6महीने ही खुलता है बाकी समय बर्फ जमने के कारण कपाट बन्द रहते हैं।वह भक्त उस समय वहां पहुंचा जब मंदिर के कपाट बंद थे।उसने पंडित जी से सारी बात कही कि वह बहुत दूर से आया है और बाबा के दर्शन करना चाहता है।लेकिन पुजारी भी मजबूर थे क्योंंकि विधिवत पूजा के बाद बन्द कपाट समय से पूर्व कैसे खोल दें।वह वहां कई बार विनिती करता रहा लेकिन यह असंभव था।हारकर वह भगवान केदार का ध्यान करना शुरू किया कि प्रभु एक बार दर्शन दे दो।पुजारी ने उससे वापस लौट जाने को कहा।क्योंकि वहां बर्फ गिरती है और वह वहां जिंदा नहीं रह सकता।वह हटा नहीं टीका रहा और शिव जी में ध्यान लगाए रहा और रात हो गई। उसे भूख और प्यास लगी थी लेकिन उसे भरोसा था कि उसे दर्शन जरूर मिलेंगे।तभी एक सन्यासी बाबा उसके पास आए और उससे पूछा कि वह कहां से आया है?भक्त ने सारी बात उनसे कह सुनाई और खाना भी खिलाया।वह सन्यासी बाबा काफी देर से उससे बातें करते रहे और भरोसा दिलाए कि कल मंदिर जरूर खुलेगा और उसको दर्शन भी होंगे।बातों में ही उसे नींद आ गई और सुबह के प्रकाश के साथ उसकी नींद खुली।आंख खुलते उसने देखा कि वह सन्यासी बाबा वहां नहीं थे।तभी उसने पुजारी को कुछ लोगों के साथ मंदिर की तरफ आते देखा।वह आश्चर्य से पूछा कि आपने तो कहा था कि मंदिर 6महीने बाद खुलेगा।पुजारी ने कहा कि तुम वहीं हो क्या जो 6महीने पहले यहां आए थे।भक्त ने बड़े अमर्श से देखा और कहा कि नहीं मैं कल ही तो यहां आया था और सन्यासी वाली बात भी उनसे कह सुनाई।तब पुजारी ने उसको समझाया कि तुमने तो साक्षात भगवान केदार के दर्शन किए।यह वही थे जो अपनी योग शक्ति के माध्यम से काल को बदल दिए और तुम्हें जीवित रखा।धन्य है तुम्हारी भक्ति।
इसीलिए कहा जाता है कि भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ शक्ति है।और जब अटूट विश्वास हो तो भगवान को भी भक्त की सुनने पड़ती है।

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