क्या आपका बच्चा हैं फोटोकॉपी

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बच्चा

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बच्चो को सही तरीके से अपनी जिम्मेदारियो का एहसास कराना होता है जरूरी।
कभी कभी हम देखते है कि माता पिता अपने बच्चो से भी उसी तरह का काम कराना चाहते है, जैसा उनका पड़ोस के रहने वाला सभ्य सुशील लड़का करता है।

एक बात याद रखिये आपका बच्चा फ़ोटो कॉपी नही है, हर बच्चा सबसे अलग होता है। जरूरी नही की जैसा आपका पड़ोसी का लड़का है, वैसा ही आपका बच्चा बने, क्यो की हर बच्चा एक जैसा नही होता।

बच्चे से कोई काम कहने से पहले ये मन मे सोच ले कि वो बच्चा ही है, और उससे गलतिया होना स्वाभाविक है। कभी कभी माता पिता बच्चो को जो काम देते है, यदि वह बच्चा सही से नही कर पाता तो माता पिता जोर से डाटते है। जिससे बच्चे के मन मे दुर्प्रभाव होता है।

जो अच्छी बात नही है बच्चो को बुरी तरह से डाटना ठीक नही होता बल्कि धैर्य रखते हुए बच्चे को अनुशासन सिखाये। उन्हें बताये की किसी काम को करने का सही तरीका क्या होता है।

दूसरी बात हर माता पिता चाहते है कि उनका बच्चा पढ़ लिख के काबिल बने। पर इसके लिए बच्चे को अनावश्यक बोझ देना ठीक नही है। बच्चो को ज्यादा बोझ देने से वो झल्ला जाएगा। चिड़चिड़ा पन उसके अंदर आएगा और फिर आप सोचने लगेंगे की आपका बच्चा सही ढंग से नही पढ़ रहा है।

ध्यान रहे छोटे बच्चो को पढ़ाने से ज्यादा सिखाने की जरूरत होती है। क्यो की बच्चे का मष्तिष्क कुछ नया सीखने के लिए लालायित रहता है। एक बात और, कई बार देखा गया है कि माता पिता बच्चो की जासूसी करते है, जो कि ठीक बात नही है। माता पिता बच्चो की बात पर विश्वास नही करते और कई माता पिता अपने बच्चो को निगरानी कुछ ज्यादा ही करने लगते है, जिससे बच्चो के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है और बाद में वो डरकर हर काम को करने लगता है।

जो उसके जीवन के लिए अच्छा नही माना जा सकता है।
अक्सर मा बाप अपने बच्चो से उम्मीदे ज्यादा लगा लेते है जिससे बच्चे तनाव में आने लगते है। अगर कोई बच्चा अपने निर्धारित लक्ष्य को नही प्राप्त कर पाता है तो वह परेशान होने लगता है। जिससे उसका प्रभाव उसके जीवन पर पड़ने लगता है।

बच्चो के माता पिता को समझना चाहिए कि वो अपने बच्चे को जो लक्ष्य दे रहे है उसमें उनका किस तरह का योगदान है। उसके बाद बच्चे की मनोदशा को परखे फिर बच्चे को कोई टास्क दे तो सफलता का प्रतिशत ज्यादा हो सकता है कुल मिलाकर कहा जाए तो ये बात सामने आती है कि कम उम्र के बच्चो को सिखाने के लिए ज्यादा प्रयास करना चाहिए, जो उसके माता पिता या गुरु द्वारा हो सकता है।

एक्टिविटी वाले कार्यो को ज्यादा देकर बच्चो को आसानी से हर चीज को समझाया जा सकता है।

सौजन्य से
शिवा कांत पांडेय

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